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जानिए भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी – रॉ के बारे में दिलचस्प और रोचक तथ्य

Indian Secret Agency RAW - Interesting Facts about RAW

Indian Secret Agency RAW - interesting Facts about raw

Indian Secret Agency RAW – interesting Facts

किसी भी देश की Secret Agency (खुफिया एजेंसी) उस देश की सुरक्षा में अपना एक अलग महत्व रखती हैं। भारतीय की भी अपनी एक खुफिया एजेंसी है जिसका नाम रिसर्च ऐंड अनालिसिस विंग – राॅ (Research and Analysis Wing – RAW) हैं। भारत की इस खुफिया एजेंसी रॉ के बारे में आपने बहुत बार फिल्मों में देखा या सुना होगा या फिर कहीं पत्रिका में पढ़ा होगा। परन्तु फिर भी इस खुफिया एजेंसी रॉ के बारे में आपको बहुत कम पता होगा एवं देश के अधिकतर लोग भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते है। क्योंकि इसके बारे में कभी-कभार ही खबरों में कुछ देखने सुनने को मिलता है। तो चलिए आइए आज हम आपको भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (Indian Secret Agency RAW)से जुड़े रोचक तथ्यों (Interesting Facts) से अवगत कराते है, जो आपकी जानकारी बढ़ाने के साथ-साथ आपको गौरवान्वित भी अनुभव करवाएंगे।

1. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) भारत का सबसे गोपनीय खुफिया विभाग है। इसका गठन सन 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद किया गया, जब इंदिरा गांधी सरकार ने भारत की भविष्य की सुरक्षा को महसूस किया। तब से यह विदेशी और घरेलू मामलों, आंतकवाद का मुकाबला करने में कार्यरत है।

2. भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का एक सिद्धांत ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ है। इस सिद्धांत मतलब है कि जो व्यक्ति धर्म की रक्षा करता है वह सदैव सुरक्षित महसूस करता है।

3. भारतीय एजेंसी रॉ का कानूनी दर्जा अभी भी अस्पष्ट है। इसीलिए अभी तक रॉ एक एजेंसी नहीं बल्कि विंग है।

4. इसी प्रकार से रॉ संसद के प्रति जवाबदेह नहीं है और साथ ही यह सूचना के अधिकार कानून से भी बाहर है।

5. भारतीय एजेंसी रॉ का गठन भी अमेरिकी के सीआईए के तहत ही किया गया है। इस रॉ के सदस्यों को अमेरिका, यूके और इजरायल में ट्रेनिंग दी जाती है। रॉ के ट्रेनिंग में सेल्फ डिफेंस की कठिन ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ता है। खासतौर से जासूसी डिवाइस के इस्तेमाल के मामले में बहुत कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। फाइनैंशियल, इकनॉमिक अनैलिसिसि, स्पेस टेक्नॉलजी, इंफॉर्मेशन सिक्यॉरिटी, एनर्जी सिक्यॉरिटी और साइंटिफिक नॉलेज जैसी अनेक जानकारी ट्रेनिंग में दी जाती है।

6. रिक्रूट को किसी एक फॉरेन लैंग्वेज में स्पेशलाइज किया जाता है और उसे जियो स्ट्रैटिजिक अनैलिसिस से भी परिचित कराया जाता है। सीआईए, केजीबी, आईएसआई, मोसाद, एमआई 6 जैसी घातक खुफिया एजेंसियों की केस स्टडीज भी पढ़ाई करायी जाती है।

7. राॅ सीधी अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को भेजती है और इसके डायरेक्टर का चुनाव सेक्रेटरी(रिसर्च) द्वारा होता हैं।

8. एक रॉ जासूस की ज़िन्दगी, फिल्मों में दर्शाई गई जासूस की ज़िन्दगी से कहीं से भी मेल नहीं खाती है। लेकिन ये जासूसी में अव्वल होते हैं। एक जासूस के राज़ उसकी मौत के साथ ही दफन हो जाते हैं। यहां तक कि उसकी पत्नी को तक नहीं पता होता कि उसका पति एक रॉ एजेंट हैं।

9. रॉ में ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को बंदूक नहीं मिलती हैं। रॉ के एजेन्ट हथियार का इस्तेमाल ज़रुरत पड़ने पर, परिस्थिति के अनुरूप करते है। हां, बचाव के लिए ये एजेन्ट अपनी तेज बुद्धि का इस्तेमाल करते हैं।

10. यदि राॅ का एजेंट देश की सेवा करते हुए दुश्मन देश में पकड़ा जाए तो अपने देश की सरकार ही उनसे पल्ला झाड़ लेती है। उनकी किसी तरह की कोई सहायता नहीं करती हैं और अंत में जब उनकी दुशमन देश में मौत हो जाती है तो उनको अपने वतन की मिट्टी तक नसीब नहीं होती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ था भारत के रविन्द्र कौशिक के साथ और अन्य बहुत से रॉ एजेंटों के साथ।

Indian Secret Agency RAW – Achievements

एजेंसी का गठन 1968 में भारत के बेहतरीन गुप्तचर विशेषज्ञों में से एक रामेश्वर नाथ काव के नेतृत्व में किया गया। मात्र तीन वर्षों में ही एजेंसी ने एक नए राष्ट्र (बांग्लादेश) के गठन में अहम भूमिका निभाई। उस समय रॉ ने सूचनाओं के आदान-प्रदान में बेहतरीन भूमिका निभाई थी।

काव के नेतृत्व में भारत ने 1971 में बांग्लादेश में सशस्त्र बलों को सहायता प्रदान की। पाकिस्तान ऑपरेशन सर्चलाइट में हार गया था। काव के नेतृत्व में रॉ को 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान के मंत्रिमंडल पर खुफिया गतिविधियों की जानकारी मिली। भारतीय वायु सेना ने उस जगह पर बमबारी की। खुफिया जानकारी के आधार पर, नौसेना कमांडो ने चटगांव बंदरगाह पर मौजूद पाकिस्तान के जहाजों को उड़ा दिया था।

रॉ ने सिक्किम के भारत में विलय होने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। चीन हमेशा से ही सिक्किम को अधिग्रहण करना चाहता था, लेकिन भारत के पास काव थे और चीन की यह कोशिश विफल रही। इस तरह सिक्किम भारतीय गणराज्य का 22वां राज्य बना।

ऐसा माना जाता है कि रॉ हाल ही में चुनावों के दौरान श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन के लिए एक मिशन पर था और वह मिशन पूरा भी हुआ।ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि माना जाता है कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे चीन से अपना मेलजोल बढ़ाने के इच्छुक थे, जो भारत के लिए सामरिक दृष्टि से उचित नहीं था।

भारत के परमाणु कार्यक्रम को गोपनीय रखना रॉ की जिम्मेदारी थी। भारतीय वैज्ञानिक और भारत सरकार इस क्षेत्र में क्या कर रही है, इसे पता लगाने में अमेरिकी खुफिया एजेन्सी सीआईए को विफलता हाथ लगी। इस घटना को सीआईए की बड़ी विफलता के रूप में देखा जाता है।

 

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